विदेशों में व्यावसायिक बैंकों की शाखाएं खोलने से पहले वित्त मंत्रालय अब एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक (एक्जिम) से सहमति लेगा। वैश्विक मंदी और कई देशों में घटते व्यापार के मद्देनजर सरकार उच्च लागत पर विदेशों में बैंकिंग सुविधाएं बहाल करने को तैयार नहीं है। सरकार उन्हीं देशों में बैंकों का नेटवर्क बढ़ाना चाहती है, जहां से उसे भरपूर लाभ मिल सके। एक्जिम बैंक को ऐसे देशों की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है जिनसे भारत का द्विपक्षीय व्यापार बेहतर है या भविष्य में इन देशों से बेहतर निवेश की संभावनाएं नजर आ रही हो।
मंत्रालय का मानना है कि वैश्विक व्यापार और दुनियाभर के देशों की आर्थिक स्थिति के बारे में एक्जिम बैंक की जानकारी उसके लिए कारगर होगी। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस रिपोर्ट के आधार पर ही बैंक भविष्य में अपने नेटवर्क का विस्तार विदेशों में कर सकेंगे। माना जा रहा है कि अगले तीन- चार महीनों में एक्जिम बैंक अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप देगा। इस बाबत बैंक ने सर्वे शुरू कर दिया है।
मौजूदा समय में दो देशों के समझौते के आधार पर बैंकिंग विस्तार होता है। इस मामले में वित्त मंत्रालय के साथ-साथ आरबीआई की भूमिका भी काफी अहम होती है। आरबीआई के मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही वित्त मंत्रालय, बैंकों को विदेशों में शाखा खोलने की अनुमति देता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया, पाकिस्तान में बैंकिंग विस्तार के इच्छुक हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच इस बारे में चर्चा शुरू करने और उन्हें अनुमति देने से पहले एक्जिम बैंक के रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा।
मालूम हो कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के तहत पाक को ऐसे देशों की सूची में डाला जा चुका है जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लांड्रिंग और आतंकियों के वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के खिलाफ कदम उठाने में सहयोग नहीं दे रहे हैं। एफएटीएफ ने इस मामले में भारत की ओर से उठाए जा रहे कदमों की सराहना की है। सूत्रों के मुताबिक, चीन में बैंकिंग गतिविधियां बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय विचार कर रहा है, लेकिन एक्जिम बैंक के सुझाव पर ही यहां भी शाखाएं खुलेगी।
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