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घोषणा पत्रों ने बढ़ाईं बैकों की मुश्किलें

लखनऊ/अमर उजाला ब्यूरो।
Story Update : Sunday, February 19, 2012    3:15 AM
Letters announcing the difficulties the banks tried to

राजनीतिक पाटियों के घोषणा पत्र से बैंक सकते में हैं। कारण है किसानों द्वारा कृषि ऋण चुकाने से मुंह मोड़ना। धान, सब्जियों और गन्ने की बिक्री के बावजूद किसान बैंकों से लिए ऋण चुकाने के बजाय सूबे में बनने वाली नई सरकार से ऋण माफी के इंतजार में हैं।

अंतिम दो महीने बैंकों पर भारी
प्रमुख राजनीतिक पार्टियों, भाजपा और सपा ने अपने घोषणा पत्र में किसानों को रिझाने के लिए वादों की झड़ी लगा दी है। ऐसे में किसी किसान को उम्मीद है कि भाजपा की सरकार बनेगी तो किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और कृषि ऋण माफ हो जाएगा तो कोई किसान, सपा की सरकार बनने की आस में ऋण नहीं चुका रहा। यही वजह है कि चालू वित्तीय वर्ष के अंतिम दो महीने बैंकों पर भारी पड़ रहे हैं।

किसान तरह-तरह के बहाने बना रहे
हालत यह है कि खुद ऋण चुकाने की बात तो दूर, बैंकों द्वारा आग्रह किए जाने के बाद भी किसान पैसा लौटाने के लिए तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। यह खुलासा बैंकों ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) को भेजी गई रिपोर्ट में की है। फिलहाल सूबे में 31 लाख से ज्यादा किसानों के पास केसीसी है। इन किसानों पर बैंकों का 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ऋण बकाया हैं। चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक किसानों ने बकाया 25 हजार करोड़ की तुलना में महज 15 हजार करोड़ जमा कराए हैं। इसी तरह बैंकों के किसानों पर कृषि कार्य के लिए दिए गए हजारों करोड़ रुपये कृषि ऋण के बकाया हैं।

ऋण न चुकाने के कारण
राजनीतिक दलों ने किसानों को लुभाने के लिए तरह-तरह केवादे किए हैं। सपा ने घोषणा पत्र में कहा है कि कृषि के लिए जमीन बंधक रख लिए गए ऋण नहीं चुकाने वाले किसानों की जमीन नीलाम नहीं होने दी जाएगी। इसी तरह भाजपा ने किसानों द्वारा लिए गए केसीसी माफ करने की बात कही है। इसी वजह से किसान ऋण चुकाने से बच रहे हैं।


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आप की राय -
Sanjay Kumar Rana, Hamirpur HP
इलेक्शन कमिशन को राजनीतिक पार्टियों को इस तरह के उलटे सीधे वादों पर रोक लगानी चाहिए . अक्सर देखा गया है कि जब भी इस तरह का कोई बयान आया है. तो लोगों ने पैसा लौटाना एकदम बंद कर दिया है.........इस खैरात को बाँटना बंद करना चाहिए.......... सही पहचान कर ही सरकारों को इस तरह की मदद के लिए आगे आना चाहिए, न की वोट बैंक के लिए...
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