टूजी आवंटन घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से टेलीकॉम कंपनियों को कर्ज देने वाले बैंकों को चपत लगने की आशंका नहीं है। तमाम टेलीकॉम कंपनियों को 14 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज देने से बैंकों की वित्तीय सेहत बिगड़ने की चिंता कर रहे वित्त मंत्रालय ने बैंकों की समीक्षा की है। समीक्षा में बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) का बोझ बढ़ने की आशंका सामने नहीं आई है।
वित्त मंत्रालय के एक आला अधिकारी ने बताया कि टेलीकॉम कंपनियों को बड़ी रकम कर्ज के रूप में देने से बैंकों को लेकर थोड़ी चिंता जरूर थी। लेकिन समीक्षा में यह पाया गया कि ज्यादातर कर्ज सुरक्षित दायरे में हैं और टेलीकॉम कंपनियां कर्ज चुकाने में सक्षम हैं। इससे बैंकों के एनपीए बढ़ने की संभावना नहीं है। अनुमानित तौर पर लाइसेंस रद्द की गई कंपनियों में बैंकों का करीब 3,300 करोड़ रुपये फंसा हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने टेलीकॉम कंपनियों को कुल 4,500 करोड़ रुपये कर्ज दे रखा है। जबकि लाइसेंस रद्द हुई कंपनियों में पंजाब नेशनल बैंक का करीब 500 करोड़ रुपये से ज्यादा, ओबीसी का करीब 600 करोड़ रुपये और कॉरपोरेशन बैंक के 146 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले हफ्ते टेलीकॉम कंपनियों के 122 लाइसेंस रद्द करने का फैसला दिया था। साथ ही अदालत ने ट्राई को नए सिरे से लाइसेंस की नीलामी के लिए सिफारिश करने और उस पर सरकार को 22 टेलीकॉम क्षेत्रों के लाइसेंस देने को कहा था।
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