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महंगे डीजल और रसोई गैस के लिए रहें तैयार

नई दिल्ली/एजेंसी।
Story Update : Wednesday, February 22, 2012    3:02 PM
LPG and diesel price increase

तेल कंपनियों का घाटा कम करने के लिए सरकार आने वाले समय में तेल और डीजल पर सब्सिडी घटा सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को इसके लिए ज्यादा कीमतें चुकानी होंगी। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के अध्यक्ष सी रंगराजन ने इसके संकेत दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए उबाल से तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि डीजल की कीमत को चरणबद्ध तरीके से प्रशासनिक नियंत्रण से मुक्त किया जा सकता है।

सब्सिडियों को ‘तर्कसंगत’ बनाना होगा
रंगराजन कहा कि विभिन्न प्रकार की सब्सिडियों के बढ़ने से राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है और इसको नियंत्रित करने के लिए सब्सिडियों को ‘तर्कसंगत’ बनाना होगा। उन्होंने कहा कि इसी के मद्देनजर डीजल की कीमत को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रण मुक्त किया जाना चाहिए। रसोई गैस के लिए कोटा प्रणाली अपनाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या निर्धारित की जानी चाहिए और उससे अधिक के लिए बाजार मूल्य पर भुगतान करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

बाजार में कच्चे तेल की कीमत ऊंची बनी
हालांकि उन्होंने कहा कि इससे महंगाई में बढ़ोतरी होगी, लेकिन उसे आगे चलकर नियंत्रित किया जा सकता है। सब्सिडियों में बढ़ोतरी होने से सरकार की विभिन्न सामाजिक परियोजनाओं के लिए धनराशि की उपलब्धता घट रही है। इसलिए पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरक सहित सभी प्रकार की सब्सिडियों को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। चालू वित्त वर्ष में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ऊंची बनी रही है और अगले वित्त वर्ष में भी इसमें 10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

उत्पादों की कीमतें बढ़ाने से महंगाई बढ़ती है
डीजल के नियंत्रण मुक्त किए जाने पर किसानों पर विपरीत प्रभाव पड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उत्पादकता बढ़ाने के उपाय किए जाने चाहिए और कृषि क्षेत्र में निवेश पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों की कीमतें बढ़ाने से महंगाई बढ़ती है। इसलिए कीमतें बढ़ाने से बेहतर है कि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया जाए, ताकि कृषि क्षेत्र का विकास हो सके। इसके साथ ही विपणन प्रणाली में भी सुधार की आवश्यकता है।
गौरतलब है कि सरकार पेट्रोल की कीमतों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप बनाने के लिए उसे प्रशासनिक नियंत्रण से पहले की मुक्त कर चुकी है।

कोटा प्रणाली अपनाने का सुझाव दिया गया
डीजल, रसोई गैस और केरोसिन की कीमतें अब भी सरकारी नियंत्रण में है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हो रही वृद्धि से देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों को चालू वित्त वर्ष में 1.30 लाख करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान लगाया जा रहा है। इस बढ़ते घाटे की भरपाई के लिए डीजल को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और रसोई गैस सिलेंडर में कोटा प्रणाली अपनाने का सुझाव दिया गया था। हालांकि राजनीतिक दबावों की वजह से सरकार इस सुझाव पर अब तक अमल नहीं कर पाई है।


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birendra, guwahati
गैस और डीजल का मूल्य बढ़ने से लोगो को काफी दिक्कतों का सामना करना पर सकता है / कृपया इस पर ध्यान दिया जाय, अन्यथा लोगो के गुस्सा का सामना करना पर सकता है /
lakhvir singh, chandigarh
कांग्रेस हे इस के लिए जिमेवार है, तेल सरकार के कहने से हे बढता है, जैसे अब इलेक्शन चल रहे है अब आयल किउ नही बाधा इलेक्शन के बाद हे आयल के कीमते कैसे बाद जाये गी,एह सब कांग्रेश के माया है, इसको भागोओ और देश को बचाओ,
NEERAJ, indore
बेकार काम किया सरकार ने इसलिए की जो गरीब थे उनको और गरीब बना दिया सरकार ने . इसलिए अब सरकार हटनी चाहिए और एक अच्छी सरकार का गठन होना चाहिए। भ्रष्टाचारी नेताओ को पार्टी व समाज से बहिष्कार कर देना चाहिए / यह मेरा आपसे व देशवासियो से अनुरोध है कि एसी सरकार अब देश में नहीं लाना , जय हिंद , जय भारत
Rakesh Dwivedi, Allahabad
कांग्रेस हमेशा जब भी सत्ता में रही है महगाई ही बढ़ाया है ' आम जनता से उसका कोई सरोकार नहीं है केवल पूंजीपतियों के लाभ के लिए ही कार्य कराती है, क्योंकि उनसे मंत्रियो की जेबें भरती है
JITENDRA SHARMA, Dammam
जिन लोगों ने कांग्रेस को वोट दिया है उन लोगों के लिए यह सबक है। आगे क्या करना है आपकी मर्ज़ी।
Rohit, Ghaziabad
कांग्रेस पार्टी ही गैस के दाम बढ़ाना चाहती है क्यों कि उसके मंत्री की जेब कैसे भरेगी।
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