सरकार ने अगले वित्त वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर बढ़कर 7.5 से 8 फीसदी रहने की संभावना जताते हुए अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए कोयला, बिजली, सड़क और रेल जैसे बुनियादी क्षेत्रों (इन्फ्रास्ट्रक्चर) में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के अध्यक्ष सी रंगराजन ने वित्त वर्ष 2011-12 की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि पीएमईएसी का अनुमान केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के 6.9 फीसदी के अनुमान से ऊपर है। रंगराजन ने सरकार का चालू वित्तीय घाटा 4.6 प्रतिशत के लक्ष्य की तुलना में अधिक रहने की बात कहते हुए इसे काबू में लाने के लिए सब्सिडी को ‘तर्कसंगत’ बनाने की जरूरत जताई।
महंगाई दर 6.5 प्रतिशत के करीब
उन्होंने कहा कि जनवरी 2012 में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर 6.5 प्रतिशत के करीब आ चुकी है, लेकिन अभी भी यह सामान्य स्तर से ऊपर है। अगले वित्त वर्ष में यह पांच से छह प्रतिशत के बीच रहेगी। सरकार की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि भुगतान संतुलन की स्थिति तंग रहेगी और चालू खाता घाटे को सीमित दायरे में बनाए रखने की आवश्यकता है। राजकोषीय घाटे को बजट बजटीय लक्ष्य के दायरे में रखने के लिए सब्सिडियों को ‘तर्कसंगत’ बनाने की जरूरत है।
अंतिम तिमाही में इसमें सुधार की संभावना
उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में बिजली क्षेत्र की विकास 8.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर अंतिम तिमाही में इसमें सुधार की संभावना है। चालू वित्त वर्ष में इन दोनों क्षेत्रों की विकास दरें क्रमश: 3.9 और 6.2 प्रतिशत रहने की संभावना है। अर्थव्यवस्था पर दबाव बने रहने के बीच सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर रहेगा और इसकी वृद्धि दर 9.4 प्रतिशत रहेगी। कोयले के उत्पादन में कमी और लौह अयस्क के निर्यात पर प्रतिबंध, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के उत्पादन में गिरावट से खनन क्षेत्र का प्रदर्शन नकारात्मक रहेगा।
महंगाई पर अंकुश के लिए आपूर्ति में सुधार जरूरी
रंगराजन ने अगले वित्त वर्ष में महंगाई दर घटकर 5 से 6 फीसदी के दायरे में आ जाने की सभावना जताई। साथ ही महंगाई को काबू में बनाए रखने के लिए खाद्य पदार्थों की कीमतों पर लगातार निगरानी रखने और खाद्यान्न के परिवहन (लाजिस्टिक) नेटवर्क विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिरता के लिए कीमतों, विनिमय दर और वित्तीय संतुलन पर ध्यान देने की जरूरत है।
जीएसटी और डीटीसी से बढ़ेगी आय
रंगराजन ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) से राजस्व में वृद्धि होने का अनुमान जताया है। उन्होंने सरकार की राजस्व आय बढ़ाने के लिए सेवा कर की दरों में बढ़ोतरी के बजाय सेवा कर के दायरे को बढ़ाने पर जोर दिया। रुपये के कमजोर पड़ने से निर्यात में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ी है, लेकिन हाल के महीनों में इसमें सुस्ती देखने को मिली है।
0
खबर पर अपनी राय दें