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खूबियां व खामियां देख कर ही लें को-ब्रांडेड कार्ड

सत्काम दिव्य
Story Update : Sunday, February 05, 2012    10:11 PM
After seeing the same qualities and flaws branded card

आवश्यकता आविष्कार की जननी है और भारत में क्रेडिट कार्ड कारोबार में इस बात को सच होते स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। मंदी खत्म होने के बाद देसी क्रेडिट कार्ड बाजार एक तरह से सुदृढ़ हो रहा है। इसमें बाजार के निचले हिस्से के गैर जिम्मेदार ग्राहकों को अलग किया जाता जा रहा है, जबकि उच्च वर्ग में विस्तार देखा जा रहा है। इसी के साथ बाजार में चल रहे को ब्रांडेड कार्ड को बैंकों से नई ताजगी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

दो तरह के विकल्प बाजार में मौजूद
एक्सक्लूसिव क्रेडिट कार्ड के रूप में पेश किए जाने वाले को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड मुख्य रूप से दो तरह के हैं। एक तो दो बैंकों के बीच गठजोड़ वाले और दूसरा बैंक और किसी रीटेल सेवा प्रदाता के बीच गठजोड़ वाले। दूसरी श्रेणी के कार्ड भिन्न सेवा प्रदाताओं जैसे किंगफिशर, शॉपर्स स्टॉप आदि से गठजोड़ वाले होते हैं, जो ग्राहकों की जरूरतों को ज्यादा कार्यकुशल ढंग से पूर्ण करने के लिए कनवर्ज करते हैं। इन्हें खास उद्देश्यों के लिए पेश किया जाता है और इनके साथ कुछ अतिरिक्त लाभ भी जुड़े होते हैं। यह लाभ रिवार्ड प्वाइंट, खास आउटलेट में छूट, मुफ्त सामान, फ्रीक्वेंट बायर प्रोग्राम, फ्लायर प्वाइंट आदि के रूप में होते हैं। ये क्रेडिट कार्ड आम तौर पर उच्च स्तर के होते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किए जाते हैं, क्योंकि इनका गठजोड़ मास्टर कार्ड और वीजा प्लंटफॉर्म से भी होता है।

सीमित होता है उपयोग का दायरा
को-ब्रांडेट क्रेडिट कार्ड से जुड़ी बारीकियों पर नजर डालने से पता चलता है कि इन को-ब्रांडेड कार्डों की अपनी सीमा होती है, जो इनकी उपयोगिता को कम करती है। पहली बात तो यह कि इनका उपयोग चुने हुए आउटलेट्स पर किया जा सकता है। इसलिए इनपर खर्च और रीवार्ड प्रोग्राम को रिडीम कराने से संबंधित प्राथमिकता तय करनी होती है, क्योंकि साझेदार प्रतिष्ठान में उपलब्ध उत्पाद और सेवाएं सीमित होती हैं। इसके अलावा दूसरे पार्टनर प्रतिष्ठान में मिलने वाले प्वाइंट को-ब्रांडेड रीटेल सेवा प्रदाता या खरीदारी पर मिलने वाले प्वाइंट के मुकाबले काफी कम होते हैं। इसके अलावा रिवार्ड प्वाइंट को रीडीम कराना हो तो आप ऐसा सिर्फ पार्टनर प्रतिष्ठान में खरीदारी के समय ही कर सकते हैं।

कीमत-किफायत में भी दिखता है झोल
को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड के लिए आपको ज्वाइनिंग और वार्षिक फीस की राशि तो चुकानी ही पड़ती है, इसके अलावा इस्तेमाल में किफायती न होना भी इनकी एक खामी है क्योंकि बाकी बची राशि पर ब्याज की दर भी ज्यादातर को ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड पर ज्यादा होती है। उदाहरण के लिए एसबीआई रेलवेज कार्ड में ज्वायनिंग और नवीकरण की फीस क्रमश: 500 और 300 रुपये है, जबकि एचडीएफसी गोल्ड क्रेडिट कार्ड 199 रुपए के वार्षिक और नवीकरण पीस पर उपलब्ध है। ट्रैवेल कार्ड के मामले में भी स्थिति अच्छी नहीं है। ऐसे कार्ड में से ज्यादातर कतिपय खरीद पर मुफ्त टिकट मुहैया कराने के वादे पर बेचे जाते हैं पर सच यह है कि उड़ान की टिकटें भी मुफ्त नहीं हैं। सिर्फ बेस फेयर नहीं लिया जाता है और आपको टैक्स, ईंधन के लिए सरचार्ज आदि का भुगतान करना ही होता है। किराये का बड़ा हिस्सा यही होता है।


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