आयकर कानून की धारा 54एफ के तहत किसी संपत्ति की बिक्री से मिली राशि का निवेश मकान खरीदने या बनवाने के लिए करने पर करदाता को करछूट दिए जाने का प्रावधान है। हालांकि अधिकांश करदाताओं के मन यह सवाल उठता है कि यदि किसी मकान को बेचकर उसका निवेश नए मकान में किया जाए, जिसका पजेशन ले लिया गया हो, लेकिन रजिस्ट्रेशन पूरा न हो पाया हो तो क्या उन्हें करछूट का लाभ मिलेगा। सीआईटी बनाम अजीत सिंह खजांची (297 आईटीआर 95) के ऐसे ही एक मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का निर्णय करदाताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
धारा 54एफ के अंतर्गत करछूट का दावा
प्रकरण अनुसार, करदाता ने अपना एक प्लाट 11,32,625 रुपये में बेचकर इंदौर में एक फ्लैट खरीदा। इसपर करदाता ने धारा 54एफ के अंतर्गत 3,50,000 रुपये करछूट का दावा किया। इसके अलावा, करदाता ने 25,000 रुपये अतिरिक्त छूट की मांग एक साल के भीतर एक अन्य फ्लैट में निवेश करने के आधार पर की। करदाता ने करछूट का अपना दावा बढ़ाकर 3,90,000 रुपये कर दिया। कर विभाग के अधिकारियों ने फ्लैट का रजिस्ट्रेशन न होने और रिटर्न दाखिल करने तक मकान का निर्माण पूरा नहीं होने का हवाला देकर करछूट के दावे से इनकार कर दिया।
करछूट के दावे को सही माना
विभाग ने कहा कि करदाता ने अभी दूसरा फ्लैट बुक किया है, न कि खरीदा है। इसलिए करछूट का उसका दावा उचित नहीं है। करदाता ने आयकर आयुक्त (अपीलीय) के यहां अपील की। आयकर आयुक्त ने करदाता द्वारा धारा 54एफ के अंतर्गत निवेश के आधार पर 3,90,000 रुपये के करछूट के दावे को सही माना। इसके बाद मामला इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल में गया। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद ट्रिब्यूनल ने करदाता के पक्ष में फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर
सीआईटी ने इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की। करदाता ने कोर्ट में मकानों के स्वामित्व के संबंध में दस्तावेज पेश किए, जिसके अंतर्गत उसने धारा 54एफ में करछूट का दावा किया था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मकानों का रजिस्ट्रेशन या निर्माण पूरा होना पहले आवश्यक नहीं है, बल्कि उनका स्वामित्व करदाता के पास होना महत्वपूर्ण है। इसलिए करदाता धारा 54एफ के तहत करछूट का हकदार है।
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