उपभोक्ता अब देशभर में हुए बीमा लोकपाल के फैसलों को देख व पढ़ सकते हैं। बीमा परिषद की गवर्निंग इकाई की वेबसाइट www.gbic.co.in पर पूरे देश में बीमा लोकपाल द्वारा दिए जा रहे फैसले उपलब्ध हैं। यह सभी फैसले जीवन व गैर जीवन बीमा उत्पादों के संबंध में हैं।
ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट के रूप में बांटा गया
वेबसाइट पर जीवन बीमा उत्पादों के फैसलों को अलग-अलग डेथ क्लेम, मोर्टेलिटी क्लेम, सरवाइवल बेनिफिट और मिलाजुला आदि सेगमेंट में वर्गीकृत किया गया है। जबकि सामान्य बीमा और गैर जीवन बीमा के फैसलों को व्हीकल बीमा, बर्गलेरी, फायर, ग्रुप मेडीक्लेम, मेडीक्लेम, ओवसरीज मेडीक्लेम, व्यक्तिगत पर्सनल एक्सीडेंट, जनता पर्सनल एक्सीडेंट और ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट के रूप में बांटा गया है।
फैसलों को भी इस वेबसाइट पर लगाया
उपभोक्ताओं के लिए यह फैसले काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनके जरिए वह मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं को जान सकेंगे और अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। हालांकि पिछले कई सालों से शीर्ष उपभोक्ता अदालत द्वारा गए फैसले उपभोक्ता फोरम की वेबसाइट www.consumercom.nic.in पर दिए जा रहे हैं। राज्य और जिला अदालतों के फैसलों को भी इस वेबसाइट पर लगाया जाता है।
सामान गुम हो जाने का क्लेम भी शामिल
बीमा लोकपाल के फैसले उपभोक्ताओं के लिए खासे सहायक साबित होंगे। जैसेकि, चंडीगढ़ लोकपाल द्वारा एक मकान मालिक की पॉलिसी के दावे पर दिया गया फैसला। इस मामले में विनोद कुमार मलिक ने शिमला में अपने घर के लिए एक बीमा पॉलिसी ली। इसमें न केवल चोरी, सेंधमारी कवर्ड था, बल्कि यात्रा के दौरान सामान गुम हो जाने का क्लेम भी शामिल था। वर्धमान यात्रा के दौरान मलिक की कार का सीसा तोड़कर किसी ने उनका सामान चुरा लिया।
अस्थायी पार्किंग भी यात्रा का ही हिस्सा
जब विनोद ने 24,175 रुपये का दावा किया, तब यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी ने दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया कि कार से चोरी उस समय हुई, जब वह वर्धमान में उनके घर से बाहर पार्क थी। बीमा लोकपाल ने अपने फैसले में कहा कि यात्रा के दौरान रास्ते में अस्थायी पार्किंग भी यात्रा का ही हिस्सा है। लोकपाल ने सामान के लिए 10,000 रुपये तक के भुगतान का आदेश दिया। इस तरह, ऐसे बीमा लोकपाल के ऐसे कई फैसले हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए काफी मददगार हो सकते हैं।
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