वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए हर साल सरकार वेतन से होने वाली आमदनी पर कर में कटौती के विस्तृत सर्कुलर जारी करती है। बीते 16 अगस्त 2011 को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने नया सर्कुलर जारी किया। प्रत्येक वेतनभोगी कर्मचारी को इस सर्कुलर को जरूर पढ़ना चाहिए। इससे वेतन की आय कराधान के सभी बिंदुओं की विस्तृत और स्पष्ट जानकारी मिलेगी।
आमतौर पर एक सवाल सामने आता है कि वेतनभोगी कर्मचारी के वेतन की आमदनी पर क्या किसी तरह की कर कटौती की जाएगी। सीबीडीटी द्वारा जारी सर्कुलर-5 में यह स्पष्ट कहा गया है कि हेड सेलरी इनकम के तहत कर्मचारी के आय की गणना पर रोजगार या प्रोफेशनल टैक्स देय होगा। यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि करदाता के वेतन पर पहले से ही की गई कटौती पर यह स्टैंडर्ड कटौती नहीं की जाएगी।
नए सर्कुलर में मकान किराया भत्ते के बारे में स्पष्ट है कि कर्मचारी द्वारा प्राप्त किए गए मकान किराया भत्ते की वास्तविक रकम या वेतन के दस फीसदी से अधिक किराया भुगतान या कोलकाता, मुंबई, दिल्ली या चेन्नई में वेतन का 50 फीसदी या देश के अन्य शहरों में वेतन का 40 फीसदी तक ही मकान किराया भत्ता के तहत करछूट मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यदि कर्मचारी अपने मकान में रहता है, तो इस स्थिति में उसे प्राप्त मकान किराए भत्ते से किसी तरह की कटौती का लाभ नहीं मिलेगा।
वेतनभोगी करदाता जब भी एरियर या एडवांस में वेतन लेता है, तो ऐसे में वह आयकर की धारा 192 के तहत करछूट का दावा कर सकता है। सर्कुलर 5 में स्पष्ट है कि एरियर के तहत मिले वेतन पर वेतनभोगी करदाता अपने नियोक्ता से फार्म 10ई लेकर धारा 89 के तहत कर में कटौती का लाभ ले सकता है। सर्कुलर में स्पष्ट है कि हाउस प्रापर्टी पर उधार ली गई रकम पर देय ब्याज का दावा वेतनभोगी करदाता कर में कटौती के लिए कर सकता है। वर्तमान में आवासीय संपत्ति पर लिए गए लोन के देय ब्याज पर 1,50,000 रुपये तक करछूट का दावा किया जा सकता है। वेतनभोगी करदाता सर्कुलर- 5 का विस्तृत अध्ययन सरकार की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर कर सकते हैं।
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