एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के कंपाउंड पर काम करने के लिए आईएसआई ने आर्किटेक्ट की नियुक्ति की थी। वर्षों तक अल कायदा सरगना को यहीं से पूरी जानकारी मिलती रही थी। एक मीडिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
हालांकि पाकिस्तान सैन्य अकादमी के पास स्थित कंपाउंड की संपत्ति के मूल रिकार्ड गायब हो चुके हैं। वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार डेविड इगनेटियस ने खुफिया सूत्र के हवाले से लिखा है कि कंपाउंड के निर्माण पर काम करने वाले आर्किटेक्ट की नियुक्ति आईएसआई ने की थी। इगनेटियस ने डेली वेबसाइट पर पोस्ट किए लेख में लिखा है कि कथित तौर पर आर्किटेक्ट को कहा गया था कि एक शीर्ष स्तर का वीआईपी इस कंपाउंड में रहने आ रहा है।
हालांकि पिछले वर्ष मई में अमेरिकी विशेष सुरक्षा बलों द्वारा लादेन के मारे जाने के बाद कोई भी ऐसी सामग्री बरामद नहीं हुई थी, जिससे उसके पाकिस्तान के उच्च अधिकारियों के साथ सीधे संबंधों का पता चलता। इगनेटियस ने लिखा है कि अमेरिकी विश्लेषकों को इस बात के सबूत मिले हैं कि अल कायदा सरगना ने अफगान तालिबान के नेता मुल्ला मोहम्मद उमर और लश्कर ए तोइबा से बात की थी।
उन्होंने सवाल उठाया है कि आईएसआई दोनों समूहों पर तत्परता से निगरानी रख रही थी तो फिर इंटरनेट के द्वारा भेजे गए ये संदेश कैसे छूट गए। स्तंभकार ने कहा है कि पाकिस्तान में बिन लादेन की मौजूदगी से संबंधित किसी भी जांच में कई मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे, 2005 में अल कायदा सरगना एबटाबाद कैसे पहुंचा और क्या पाकिस्तानी अधिकारियों को उसके ठिकाने के बारे में जानकारी थी। उन्होंने लिखा है कि वर्तमान सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी उस समय आईएसआई प्रमुख थे। पर उस समय पूर्व सेना प्रमुख, राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ अधिक प्रभाव वाली स्थिति में थे।
इगनेटियस ने पूर्व आईएसआई प्रमुख जनरल जियाउद्दीन बट के उस दावे की ओर इशारा किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि एबटाबाद कंपाउंड को इंटेलिजेंस ब्यूरो ने अपने प्रयोग में लिया था। दिसंबर में पाकिस्तानी प्रेस की एक रिपोर्ट ने बट के हवाले से बताया कि एबटाबाद में लादेन के रुकने की व्यवस्था 2004-08 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख रहे ब्रिगेडियर एजाज शेख ने मुशर्रफ के आदेश पर की थी। उन्होंने उस अफवाह पर भी जोर दिया, जिसमें ओसामा के किडनी खराब होने की बात की गई थी।
सीआईए विश्लेषकों को संदेह था पर वहां से कोई भी डायलिसिस मशीन नहीं मिली। पाकिस्तान के नेताओं व सैन्य अधिकारियों ने रिपोर्ट को खारिज किया है कि उन्हें बिन लादेन के देश में होने की जानकारी थी। फिलहाल एक न्यायिक आयोग इस मामले की जांच कर रहा है।
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