अमेरिकी संसद में बलूचिस्तान के मुद्दे पर एक प्रस्ताव पेश किया गया है। तीन सांसदों ने प्रतिनिधि सभा में पेश इस प्रस्ताव में कहा है कि पाकिस्तान के अशांत दक्षिण बलूचिस्तान प्रांत में लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार मिलना मिलना चाहिए।
रिपब्लिकन प्रतिनिधि डाना रोहराबेकर और दो अन्य सांसदों ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा है कि फिलहाल पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान के बीच बटे बलूच नागरिकों को आत्मनिर्णय और संप्रभु देश का अधिकार होना चाहिए। उन्हें खुद का स्तर तय करने का मौका मिलना चाहिए। विदेश मामलों की सदन की एक उप समिति के सदस्य रोहराबेकर ने पिछले हफ्ते बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों पर कांग्रेस की सुनवाई का आयोजन किया था।
रोहराबेकर ने एक बयान में कहा, ‘वे वहां जो राजनीतिक और जातीय भेदभाव सह रहे हैं वह बहुत भयावह है, और हालत इसलिए और भी ज्यादा बिगड़ गई है क्योंकि अमेरिका उनका दमन करने वालों को आर्थिक मदद दे रहा है तथा हथियार बेच रहा है।’ सांसद लुई गोहमर्ट और स्टीव किंग ने इस प्रस्ताव पर दस्तखत किए हैं। रोहराबेकर ने कहा कि अन्य देशों की जनता की तरह ही बलूच लोगों को भी आत्मनिर्णय का जन्मसिद्ध अधिकार हासिल है।’
उन्होंने कहा ऐतिहासिक रूप से बलूचिस्तान स्वतंत्र था। पाकिस्तान ने 1947 में आजादी फिर से पाने की बलूच लोगों की कोशिशों को नाकाम कर दिया। रोहराबेकर ने कहा कि आज बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों के मामले में समृद्ध है, लेकिन बलूच शोषित हैं, यह प्रांत पाक का सबसे तंगहाल प्रांत बना हुआ है।
अमेरिकी प्रस्ताव पर आगबबूला हुआ पाक
इसलामाबाद। पाकिस्तान ने अमेरिकी संसद में बलूचिस्तान पर पेश प्रस्ताव पर विरोध जताया है। पाक के शीर्ष नेताओं ने इस प्रस्ताव को नकार दिया है। प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने प्रस्ताव की निंदा करते हुए इसे देश की संप्रभुता पर हमला करार दिया है। विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने कहा है कि यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के विरुद्ध है। तीन अमेरिकी सांसदों द्वारा प्रतिनिधि सभा में पेश प्रस्ताव में कहा गया है कि बलूचिस्तान के लोगों को आत्मनिर्णय और संप्रभु देश का अधिकार मिलना चाहिए। उन्हें खुद का स्तर तय करने का अवसर मिलना चाहिए।
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