आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने एक बार फिर दोहराया कि उनका देश पाकिस्तान को यूरेनियम का निर्यात नहीं करेगा। पाकिस्तान पहले भी मांग कर चुका है कि आस्ट्रेलिया ने जिस तरह भारत को यूरेनियम का निर्यात करने के लिए अपनी नीतियों में बदलाव किया है वैसे ही वह पाकिस्तान के लिए भी करें।
गिलार्ड ने एक इंटरव्यू में कहा कि आस्ट्रेलिया की यह नीति एक अपवाद है जो केवल भारत के साथ संबंधों में बदलाव के लिए राष्ट्रीय हित को मान्यता देती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के मामले में यह मुद्दा ही नहीं उठता क्योंकि उसे परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से छूट नहीं मिली है।
गिलार्ड ने इस बात का भी संकेत दिया कि भारत को परमाणु ईंधन बेचने पर आस्ट्रेलिया के प्रतिबंध के फैसले को पलटने में अमेरिका एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था। भारत से प्रतिबंध हटाने के पीछे मुख्य कारण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भारत को यूरेनियम न बेचने की बात उस समय की है जब व्यापक अंतरराष्ट्रीय रणनीति के हिस्से के रूप में यह माना जाता था कि नई दिल्ली को परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के दायरे में लाना है।
गिलार्ड ने कहा कि वर्ष 2007 में हुए अमेरिका-भारत असैन्य परमाणु समझौते ने इस रणनीति को बदल दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते को देखते हुए आस्ट्रेलिया को अपने पुराने रुख पर कायम रहना कि वह भारत के साथ परमाणु व्यापार नहीं करेगा, ज्यादा महत्व नहीं रखता।
गिलार्ड ने कहा कि भारत को यूरेनियम के निर्यात के फैसले के पीछे केवल यह बात नहीं थी कि इसके लिए अमेरिका प्रयास कर रहा था, बल्कि ऐसा दो प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के बीच गहरे सम्बंधों के चलते हुआ। उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया और भारत के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा एवं विज्ञान के क्षेत्र में मजबूत संबंध हैं।
गिलार्ड ने कहा कि गहरे रिश्तों के बावजूद, शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम बेचने के संबंध में हम भारत के साथ एक अलग ढंग से पेश आए। उन्होंने कहा कि जहां तक आस्ट्रेलिया का संबंध है, यूरेनियम की बिक्री पर प्रतिबंध हटाने के फैसले का साफ असर नई दिल्ली के नजरिए पर पड़ा।
गिलार्ड ने उम्मीद जताई कि आस्ट्रेलिया के चौथे सबसे बड़े व्यापार सहयोगी भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध आगे बढ़ते रहेंगे।
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