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भारतीय छात्रों की है हर देश को दरकार

लंदन।
Story Update : Tuesday, February 21, 2012    11:26 PM
Every country needs of Indian students

भारतीय छात्रों को अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और न्यूजीलैंड के शिक्षा संस्थान आकर्षित करते रहे हैं। वर्ष 2008 और 2009 के आंकड़ों के अनुसार भारतीय छात्रों को सबसे ज्यादा आस्ट्रेलिया ने आकर्षित किया। लेकिन 2010 में वहां छात्रों पर हिंसक हमलों के बाद संख्या में तेजी से गिरावट आई। इनमें कुछ देशों के शिक्षा संस्थान विदेशी छात्रों पर ही निर्भर हैं। भारत समेत कई देशों से अगर छात्र वहां पढ़ाई करने न जाएं तो ऐसे संस्थान दिवालिया तक हो सकते हैं।

ब्रिटेन में नई छात्र वीजा नीति का विरोध
भारत और दूसरे देशों से आने वाले छात्रों की वीजा नीति में हाल ही में हुए बदलाव का ब्रिटेन में जबर्दस्त विरोध हो रहा है। इस नई नीति से भारत और दूसरे देशों के छात्रों का पढ़ाई के लिए ब्रिटेन आना प्रभावित होगा, जिससे इन देशों से आने वाले छात्रों की संख्या कम हो जाएगी। ब्रिटेन के दो प्रमुख संगठनों ने छात्र वीजा नीति में बदलाव का विरोध किया है। ब्रिटिश कौंसिल और यूनिवर्सीटीज यूके ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

पोस्ट स्टडी वर्क वीजा अभी तक मिलता रहा
इस बदलाव से छात्र वीजा के साथ पोस्ट स्टडी वर्क वीजा अभी तक मिलता रहा है, जिससे भारत समेत कई देशों से स्व वित्तपोषित स्कीम के तहत पढ़ाई करने आने वाले छात्रों को आर्थिक मदद मिल जाया करती थी। अप्रैल से इस वीजा पर रोक लग जाएगी। इससे छात्रों को वहां काम करने का अनुभव भी हासिल होता था। यूके यूनिवर्सिटीज की कार्यकारी प्रमुख निकोल डैंड्रिज का कहना है कि हम वीजा के दुरुपयोग का विरोध करते हैं, लेकिन हम नए कानून में पोस्ट स्टडी एमप्लायमेंट को सीमित किए जाने के बारे में चिंतित हैं। उनके अनुसार शिक्षा क्षेत्र पर असर पड़ेगा, ‘वह ग्लोबल टैलेंट पूल’ कम होगा, जिससे नियोक्ता प्रोफेशनल्स का चयन करते हैं।

भारतीय छात्रों को कोई खतरा नहीं: आस्ट्रेलिया
नई दिल्ली। आस्ट्रेलिया में वर्ष 2010 में कई भारतीय छात्र हिंसा का शिकार बने थे। इतना ही नहीं कई शिक्षा संस्थान बंद भी हुए थे, जिससे तमाम भारतीय छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया था। इन सब घटनाओं के असर से भारत से आने वाले छात्रों की संख्या पर असर न पड़े, इसके लिए आस्ट्रेलिया कोशिशें जारी रखे हुए है। मंगलवार को आस्ट्रेलिया ने कहा है कि उनके देश में भारतीय छात्रों को खतरा नहीं है, उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए हैं। इस संबंध में भारत के शैक्षिक संस्थानों और आस्ट्रेलियाई राज्य विक्टोरिया के बीच सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। मौके पर विक्टोरिया के प्रधानमंत्री टेड बैलिउ ने कहा कि 2010 की घटनाओं के बाद भारतीय छात्रों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं। टेड ने कहा इस मामले को काफी गंभीरता से लिया गया है, सुरक्षा के कई कदम उठाए गए हैं, पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है। उनके अनुसार, पुलिस को और अधिक अधिकार दिए गए हैं, काफी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।


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