चीन तिब्बत में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश में बौद्ध मठों में प्रबंध समितियां स्थापित करने की कवायद में जुट गया है। हाल के दिनों में कई बौद्ध भिक्षुओं के आत्मदाह और उनके बीच पनप रहे विद्रोही तेवरों के मद्देनजर चीन ने यह अहम कदम उठाया है। स्थानीय धार्मिक मामलों के प्रभारी एक अधिकारी ने यहां सरकारी मीडिया को बताया कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के सभी बौद्ध मठों में एक प्रबंध समिति बनाई गई है, जिससे कि मठों के सामान्य मामलों की देखरेख हो सके।
बौद्ध भिक्षुओं और ननों को शामिल किया
तिब्बती संयुक्त मोर्चा के कार्य विभाग के तहत आने वाले धार्मिक मामलों के कार्यालय के निदेशक लोउबू दुंझू ने बताया कि सरकारी अधिकारियों की अध्यक्षता में बनाई गई इन कथित मठ समितियों में ऐसे बौद्ध भिक्षुओं और ननों को शामिल किया गया है जो पर्यटकों के स्वागत सत्कार, सांस्कृतिक निशानियों की सुरक्षा और स्थानीय लोगों का धार्मिक मामलों में सहयोग करते हैं। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में लोउबू ने बताया कि सद्भावनापूर्ण मठों की स्थापना के मिशन के तहत वे इन समितियों का गठन कर रहे हैं।
छोटे मठों की समितियों में इससे कम सदस्य
लोउबू के मुताबिक, तिब्बत में मठ प्रबंधन समितियों के गठन की शुरुआत बीते वर्ष नवंबर में शुरू हुई थी और अब तक लगभग 1,787 मठों में इस तरह की समितियों का गठन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बड़े मठों की समितियों के गठन में 30 लोग शामिल किए जा सकते हैं, जबकि छोटे मठों की समितियों में इससे कम सदस्य होंगे। एक अनुमान के अनुसार तिब्बत में तकरीबन 40,000 बौद्ध भिक्षु हैं।
नववर्ष को देखते हुए तिब्बती इलाके में तनाव
अगले सप्ताह तिब्बती नववर्ष को देखते हुए तिब्बती इलाके में तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि 14 मार्च 2008 में तिब्बत की राजधानी ल्हासा में दंगे भड़क उठे थे, इन दंगों की भी चौथी वर्षगांठ अगले महीने है। तिब्बती नववर्ष 22 फरवरी से शुरू हो रहा है। दलाई लामा की वापसी की मांग को लेकर तिब्बत में कई तिब्बती आत्मदाह कर चुके हैं। बहरहाल प्रशासन यहां इस तरह के खतरों से निपटने के लिए काफी सतर्क हो गया है, सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है।
0
खबर पर अपनी राय दें