भारत और सऊदी अरब ने रक्षा मंत्री ए के एंटनी की दो दिवसीय यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के तरीकों पर मंथन किया। दोनों देशों ने रिश्तों की राह तैयार करने के लिए रक्षा सहयोग पर एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्णय लिया। सऊदी प्रेस एजेंसी (एसपीए) द्वारा जारी रपट के अनुसार, रक्षा मंत्री शहजादा सलमान बिन अब्दुल अजीज ने मंगलवार को उप रक्षा मंत्री शहजादा खालिद बिन सुल्तान बिन अब्दुल अजीज के साथ एंटनी से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत
किसी भारतीय रक्षा मंत्री का सऊदी अरब का यह पहला दौरा था। यह दौरा सोमवार को शुरू हुआ था। भारतीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सीतांशु कर ने प्रतिनिधिमंडल के स्वदेश लौटने पर बुधवार को नई दिल्ली में कहा, ‘दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारत और सऊदी अरब ने रिश्तों की राह तैयार करने के लिए रक्षा सहयोग पर एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्णय लिया है।’ कर ने कहा, ‘यह निर्णय रियाद में मंगलवार को दोनों देशों के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के दौरान लिया गया।’
उप प्रमुख एडमिरल सतीश सोनी शामिल
एंटनी के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी सऊदी अरब गया था, जिसमें रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा, सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस के सिंह और नौसेना के उप प्रमुख एडमिरल सतीश सोनी शामिल थे। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संयुक्त समिति रक्षा सहयोग, हर स्तर पर उच्चस्तरीय दोतरफा दौरों, पोत निरीक्षण सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की योजना तैयार करेगी। यह समिति जल सर्वेक्षण में सहयोग, प्रशिक्षण कार्यक्रमों में दोनों पक्षों की भागीदारी बढ़ाने पर एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर की संभावना भी तलाशेगी, और रक्षा उद्योगों में सहयोग की संभावना का परीक्षण करेगी।
सुझाव से शहजादा सलमान ने सहमति जताई
एंटनी ने सुझाव दिया कि निकट भविष्य में भारतीय रक्षा उत्पादन केंद्रों को देखने के लिए सऊदी अरब से एक प्रतिनिधिमंडल भारत भेजा जाए। एंटनी के इस सुझाव से शहजादा सलमान ने सहमति जताई। शहजादा सलमान ने इस वर्ष भारत का दौरा करने का एंटनी का निमंत्रण भी स्वीकार कर लिया। हिंद महासागर क्षेत्र में डकैती की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए भारत ने सुझाव दिया कि दोनों देशों की नौ सेनाएं इससे निपटने में व्यवहारिक सहयोग तलाश सकती हैं, और इसके लिए रॉयल सऊदी नेवी, हिंद महासागर नौ सैन्य सिंपोजियम (आईओएनएस) की रचना में एक सक्रिय भूमिका निभा सकती है। सऊदी रक्षा मंत्री ने इन सुझावों को तुरंत स्वीकार कर लिया। दोनों पक्षों ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात की समीक्षा करने के साथ ही सभी मुद्दों को शांतिपूर्ण संवाद के जरिए सुलझाने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
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