सीरिया में इदलिब प्रांत के एक गांव और होम्स प्रांत में पिछले चौबीस घंटों में राष्ट्रपति बशर अल असद को हटाने की मांग कर रहे विद्रोहियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष मे 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इस बीच अमेरिका ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय मदद पहुंचाने के रेडक्रॉस के प्रस्ताव का समर्थन किया है।
इदलिब और होम्स प्रांत में हुई मौतें
सीरियन आब्सर्वेटरी फार ह्यूमन राइट्स ने बुधवार को बताया कि पश्चिमोत्तर इदलिब प्रांत के अबदिता गांव में मंगलवार को हुए संघर्ष में करीब 33 लोग मारे गए जबकि 31 अन्य लोगों को होम्स प्रांत में हिंसा में अपनी जान गंवानी पड़ी है। होम्स के बाबा अम शहर तथा खालदिएह और कार्म अल जैतून जिलों में भारी गोलाबारी में अधिकांश लोगों की मौत हो गई।
रूसी मोर्टारों से हुए हमले
होम्स में कार्यरत जननरल कमीशन आफ सीरियन रिवोल्यूशन के कार्यकर्ता हादी अब्दुल्ला ने बताया कि होम्स में बड़ी संख्या में अतिरिक्त बल को रवाना किया गया है। अब्दुल्ला ने कहा कि हमने बुधवार सुबह से दो घंटे के अंदर बाबा अम, में 150 गोलों की गर्जना सुनी। इसके बाद हमने गिनती बंद कर दी। ह्यूमन राइट्स वाच के निदेशक पीटर बुकार्त ने बताया कि होम्स में हुए हमलों में रूस निर्मित 240 एमएम के मोर्टारों का इस्तेमाल किया गया है।
मोर्टारों की संख्या का नहीं पता चला
होम्स में पिछले 18 दिनों से संघर्ष जारी है। उन्होंने अंदाजा लगाया कि इन मोर्टारों का इस्तेमाल सुरक्षा बलों ने नागरिकों पर किया है। उन्होंने कहा कि इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि 250 पाउंड का मोर्टार अत्याधुनिक बख्तरबंद वाहन से ही छोड़ा जा सकता है। इसके इस्तेमाल के लिए नौ लोगों के टीम की जरूरत होती है। यह सुविधा सुरक्षा बलों के पास ही हो सकती है। हालांकि मृतकों की संख्या और मोर्टार के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हो सकी है।
नए संविधान मसौदे का हो रहा विरोध
उत्तरी शहर अलेप्पो के अलोप्पो विश्वविद्यालय के ढाई हजारों छात्रों के धरना प्रदर्शन के दौरान हिंसा होने पर सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलाईं। इस बीच धर्म निरपेक्ष समूहों ने नए संविधान के मसौदे के उस प्रस्ताव का विरोध करने के लिए संसद के बाहर धरना-प्रदर्शन किया, जिसमें कहा गया है कि देश का राष्ट्रपति बनने के लिए मुसलमान होना अनिवार्य है।
इस बीच रेडक्रॉस ने सीरिया में रोजाना दो घंटे का संघर्ष विराम लागू करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि इस दौरान वह हिंसा से त्रस्त लोगों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति कर सके। अमेरिका ने उसके इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।
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