विश्व की सबसे प्राचीन व बड़े भूभाग पर विकसित रही सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़ी शहरी व्यवस्था के उदाहरण मोहनजोदड़ो के बारे में आम लोगों को परिचित कराने के लिए पाकिस्तान ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है। यहां पर्यटन को बढ़ावा देने और पुनर्वास के लिए पाकिस्तान ने 100 मिलियन रुपये की धनराशि स्वीकृत की है।
मृतकों का टीला नाम से प्रसिद्घ मोहनजोदड़ो 2600 बीसी में मौजूद था, जहां आज पाकिस्तान का सिंध प्रांत बसा है। भौगोलिक रूप से यह सभ्यता करीब 1,260,000 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली थी। पिछले वर्ष अप्रैल में संघीय सरकार से इस क्षेत्र को सिंध प्रांत के सुपुर्द कर दिया था। प्रांतीय सरकार ने मोहनजोदड़ो के पुनर्वास के लिए एक बोर्ड व तकनीकी आयोग का गठन किया है।
सिंध प्रांत के सांस्कृतिक सचिव अजीज उकैली ने एक बयान में कहा कि कार्यकारी बोर्ड ने इस क्षेत्र का टोपोग्राफी सर्वे करने व मोहनजोदड़ो के रेस्ट हाउस की मरम्मत करने का फैसला किया है। मोहनजोदड़ो की खुदाई में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय पुरातात्विक विभाग के पूर्व महानिदेशक सर जान मार्शल के वाहन की मरम्मत भी की जाएगी तथा उनके द्वारा लिखी पुरानी पुस्तकों को फिर से प्रकाशित किया जाएगा।
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