अवमानना मसले पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को 28 फरवरी तक राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई टाल दी है। इससे पहले अदालत ने गिलानी के वकील एतजाज अहसान को अपने सभी सबूत 27 फरवरी तक पेश करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई अब 28 फरवरी को होगी।
दस्तावेज संबंधी साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए
सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय पीठ ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई दोबारा शुरू की, जिस दौरान अटार्नी जनरल सैयद मौलवी अनवर उल हक ने राष्ट्रीय मेलमिलाप अध्यादेश के फैसले की सत्यापित प्रति और प्रधानमंत्री के खिलाफ दस्तावेज संबंधी साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान हक ने गिलानी के खिलाफ और साक्ष्य पेश करने की अनुमति मांगी। जिस पर गिलानी के वकील अहसान ने आपत्ति करने की बात कही।
बदलने का अधिकार न्यायालय के पास सुरक्षित
इससे पहले न्यायालय ने अटार्नी जनरल हक के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी, जिसमें कहा गया था कि हक ने गिलानी के मातहत काम किया है इसलिए वह उन्हीं के खिलाफ अभियोजक की भूमिका नहीं निभा सकते है। कोर्ट ने शाहिद ओरकजई की याचिका यह कहकर खारिज कर दी कि यदि अभियोजक अपना काम ठीक से नहीं करते हैं तो उन्हें बदलने का अधिकार न्यायालय के पास सुरक्षित है । न्यायालय ने 13 फरवरी को गिलानी को अवमानना का अभियुक्त बनाया था।
पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मुल्क कर रहे
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दोबारा खोलने के लिए स्विट्जरलैंड प्रशासन को पत्र लिखने के न्यायालय के आदेश का पालन न करने के लिए गिलानी को मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। सात सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मुल्क कर रहे है। पीठ में शामिल अन्य न्यायाधीश हैं - न्यायमूर्ति आसिफ सईद खान खोसा, न्यायमूर्ति सरमद जलाल उस्मानी, न्यायमूर्ति एजाज अफजल खान, न्यायमूर्ति एजाज अहमद चौधरी, न्यायमूर्ति गुलजार अहमद तथा न्यायमूर्ति मोहम्मद एथर सईथा।
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