पाकिस्तान में भारत के विरोधी रहे कट्टरपंथियों ने सोमवार को इस्लामाबाद में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन किया। इसमें कट्टरपंथी ताकतों के सबसे बड़े समूह लश्करे तैयबा के बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया। ज्ञात रहे कि लश्करे तैयबा के संस्थापक हाफिज मोहम्मद सईद समेत उसके सरगनाओं का राजधानी में घुसने पर प्रतिबंध हैं।
हजारों की संख्या में थे प्रदर्शकारी
हालांकि सरकार के साथ टकराव टालने के लिए प्रतिबंधित सदस्यों ने धरना-प्रदर्शन में भाग न लेने का फैसला किया है। जमात उद दावा के प्रवक्ता याहया मुजाहिब ने कहा कि सरकार के साथ टकराव टालने के लिए हाफिज रैली में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सईद के प्रतिनिधि के तौर पर मौलाना अब्दुल रहमान मक्की और मौलाना अमीर हमजा रैली में शिरकत करेंगे। हजारों की संख्या में इकट्ठा होकर पाकिस्तान काउंसिल के सदस्यों ने राजधानी के मरकज से मुख्य भाग आबपारा की ओर कूच किया। अमेरिका विरोधी धरना सुबह से शाम तक चला।
अमेरिका विरोधी नारे लगाए
प्रदर्शनकारी 'अमेरिका वापस जाओ', 'नाटो नहीं चलेगा', 'घमंडी अमेरिका अन्य लोग भी मनुष्य हैं', 'दासता की जंजीरें अब टूट कर रहेगी' आदि नारे लगा रहे थे। बुलेट जैकेट पहने और हथियारों तथा लाठियों से लैस बड़ी संख्या में दंगा निरोधी दस्ता धरना स्थल पर तैनात था। प्रशासन ने डीपीसी के तीन सरगनाओं सईद और अहले सुन्नात वल जमात के मौलाना मोहम्मद अहमद लुधिवानवी और मौलाना खालिद ढिल्लन के इस्लामाबाद प्रवेश पर हाल ही में प्रतिबंध लगा दिया है।
पहले से घोषित था धरना-प्रदर्शन
प्रतिबंध के बावजूद डीपीसी ने रविवार को कहा था कि उसके समर्थक अमेरिकी ड्रोन हमलों और नाटो के लिए रसद आपूर्ति मार्ग खोले जाने के विरोध में सोमवार को धरना-प्रदर्शन करेंगे। डीपीसी ने हाल ही में आयोजित अपनी विभिन्न रैलियों में भारत और अमेरिका का विरोध किया था। सईद ने धमकी दी थी कि यदि भारत के साथ व्यापार संबंध मजबूत करके उसे तरजीही राष्ट्र का दर्जा दिया जाता है या नाटो के आपूर्ति रास्ता खोला जाता है तो वह उसका कड़ा विरोध करेगा।
पाक रक्षा मंत्री को हटाने की मांग
मौलाना सैमुअल हक ने कहा है कि यदि सरकार अफगानिस्तान में तैनात नाटो सैनिकों की मदद के लिए अपना हवाई मार्ग खोलेगी तो वह सरकार के
इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा। डीपीसी ने नाटो के लिए आपूर्ति मार्ग का खोलने का फैसला करने के लिए रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख्तार को पद से हटाने की मांग की है। रावलपिंडी के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे सईद या लुधियानवी के खिलाफ कार्रवाई करने में इसलिए लाचार हैं, क्योंकि वे पंजाब सरकार के अधीन काम करते हैं। जबकि उन पर प्रतिबंध लगाने वाली इस्लामाबाद पुलिस संघीय सरकार के तहत आती है।
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