जिस पश्चिमी यूपी में पिछली बार बसपा के हाथी ने धूम मचाई थी, उसी मैदान-ए-जंग में अब पार्टी को विपरीत हालात में जूझना पड़ रहा है। एक ओर तो कांग्रेस-रालोद गठजोड़ मुसलिम मतों को प्रभावित करने की स्थिति में है तो दूसरी यहां एंटी इनकम्बेंसी भी दिख रही है। ऐसे में मायावती सरकार के सात मंत्रियों को अपने गढ़ बचाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
पश्चिमी यूपी में पार्टी का जनाधार बढ़ाने को ही मायावती ने इन्हें मंत्री बनाया था ताकि यह अपने कामकाज और छवि से पार्टी को मजबूती दे सके । यह उन 22 मंत्रियों में शामिल हैं जो टिकट काटे जाने के पार्टी के जोरदार अभियान के बीच अपना टिकट बचा ले गए। इन मंत्रियों में ठाकु र जयवीर सिंह, वेदराम भाटी, धर्म सिंह सैनी, लखीराम नागर, योगराज सिंह, रामवीर उपाध्याय तथा चौधरी लक्ष्मी नारायण शामिल हैं। इन मंत्रियों के लिए चुनौती केवल इतनी नहीं कि वे खुद भी जीतें बल्कि यह भी है कि अपने जिले में अधिकतम सीटों पर बसपा को जिताएं। यह उनके लिए दोहरी प्रतिष्ठा का सवाल है।
चौधरी लक्ष्मी नारायण : कृषि मंत्री
पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से संकटमोचक साबित हुए लक्ष्मी नारायण की अब असली परीक्षा है। मथुरा की छाता सीट पर वे प्रत्याशी हैं। अब तक चार बार विधायक रह चुके लक्ष्मी नारायण को यहां रालोद-कांग्रेस गठजोड़ से मुश्किलें आ रही हैं। उन्हें रालोद के ठाकुर तेजपाल सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है।
रामवीर उपाध्याय : ऊर्जा मंत्री
रामवीर अब तक तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। मायावती सरकार में तीन बार मंत्री बनने का मौका मिला। पिछली बार रालोद के देवेंद्र अग्रवाल को हराया था । महामाया नगर की सिकन्दरा-राऊ सीट से बसपा प्रत्याशी रामवीर क ई मामलों में लोकायुक्त जांच में फंसे हैं। विरोधी इस मुद्दे पर घेरकर उनके लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। इस जिले में बसपा ने दो तथा भाजपा व रालोद ने एक एक सीट पिछले चुनाव में जीती थी।
वेदराम भाटी : होमगार्ड व प्रान्तीय रक्षा दल
वेदराम भाटी को दलित वोटों के साथ अपने सजातीय गुर्जर बिरादरी का खासा समर्थन है। पिछली बार उन्होंने बुलंदशहर क ी सिकन्दराबाद सीट पर 48897 वोट लेकर सपा के नरेद्र सिंह क ो हराया था। इस बार मामला उलझा हुआ है। वेदराम भाटी अब गौतमबुद्घनगर की जेवर सीट से प्रत्याशी हैं। यहां उनको कांग्रेस-रालोद गठजोड़ के अलावा सपा से खासी चुनौती मिल रही है।
लखीराम नागर : लघु सिंचाई
मेरठ की खरखौदा सीट से पिछली बार जीते लखीराम नागर इस बार किठौर से मैदान में हैं। यहां भारी तादाद में मुसलित मतदाता हैं। सपा ने यहां मौजूदा विधायक मुसलिम शाहिद मंजूर को उतारा है। इससे सपा काफी उत्साहित हैं। यहां मुकाबला बेहद कड़ा है और ऊंट किसी करवट बैठ सकता है। मेरठ में पिछली बार बसपा ने चार, सपा, भाजपा ने एक एक सीट जीती थी।
ठाकुर जयवीर सिंह : ग्रामीण अभियंत्रण सेवा
ठाकुर जयवीर सिंह पिछली बार अलीगढ़ की बरौली सीट से जीते थे उन्होंने 49028 वोट लेकर रालोद के दलवीर सिंह को हराया था। इस बार इसी सीट से दलवीर फिर मुकाबले में हैं। पिछली बार बसपा, भाजपा व रालोद तीनाें को दो दो सीटें मिली थीं। इस बार जयवीर सिंह के लिए चुनौती ज्यादा है। उन्हें एंटी इनकम्बेंसी का भी सामना करना पड़ रहा है।
योगराज सिंह : कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान राज्य मंत्री
मुजफ्फरनगर की खतौली सीट से पहली बार हाथी पर सवार हो कर चुनाव लड़े और जीत गए। बाद में मंत्री बने। रालोद के राजपाल सिंह बालियान को 22184 वोट मिले थे जबकि योगराज 98255 वोट ले गए। पिछली बार तो बसपा इस जिले में चार सीटे जीत लेकर अव्वल रही थी। यह योगराज सिंह इस बार बुढ़ाना से मैदान में हैं।
धर्म सिंह सैनी : बेसिक शिक्षा मंत्री
धर्म सिंह सैनी इस बार सहारनपुर की नकुड़ सीट से प्रत्याशी हैं जहां उनको कड़ी टक्कर कांग्रेस के इमरान मसूद से मिल रही है। मसूद पिछली बार निर्दलीय जीते थे। वे पूर्व सांसद रशीद मसूद के भतीजे हैं। सैनी ने पिछला चुनाव सरसावां सीट से चुनाव लड़ा और सपा के मो. दिलशाद को हराया। सैनी ने 68440 वोट पाये। तो दिलशाद ने 31767 वोट मिले। सैनी दो बार चुनाव जीत चुके हैं। पिछली बार तो बड़े अंतर से जीते थे लेकिन इस बार राह में काफी कांटे विरोधियों ने बिछा रखे थे।
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